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Wednesday, April 5, 2023

Chamayavilakku Festival: केरल का अनोखा फेस्टिवल, स्त्री बनकर मंदिर जाते हैं पुरुष, लोग नहीं कर पाते मर्द-औरत में फर्क

Men Dress As Women In Kerala Festival: भारत में अनगिनत त्योहार मनाए जाते हैं. यूं तो हर धर्म, राज्य और समुदायों के त्योहार को मनाने का अपना एक अलग अनूठा तरीका होता है. एक ऐसा ही त्योहार है 'चमयाविलक्कू' उत्सव, (Chamayavilakku festival) जो केरल के कोल्लम जिले के देवी मंदिर में हर साल मार्च की महीने में मनाया जाता है. हालांकि, त्योहार का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि, इसे सेलिब्रेट करने के लिए पुरुष साड़ी पहनकर महिलाओं की तरह तैयार होते हैं और एक अनोखे अनुष्ठान में शामिल होते हैं. आस्था और भगवान में विश्वास का ये अनोखा नजारा देखने दूर-दूर से लोग यहां आते हैं. 

यहां देखें पोस्ट

मान्यता है कि, केरल के कोल्लम जिले के कोट्टंकुलंगरा देवी मंदिर में देवों को खुश करने और अपनी मनोकामना पूर्ती के लिए सैकड़ों पुरुष महिलाओं की तरह कपड़े पहनकर तैयार होते हैं. इस उत्सव के दौरान पुरुष को महिलाओं की तरह साड़ी पहनकर और सज संवरकर मंदिर में जाते देखा जाता है. इसके बाद वह देवी की आराधना में लीन हो जाते हैं. केरल में यह दो दिवसीय वार्षिक उत्सव पारंपरिक रीति-रिवाजों और प्रार्थनाओं के साथ मनाया जाता है.

भारतीय रेलवे के एक अधिकारी अनंत रूपनगुडी ने चमायाविलाक्कू उत्सव के दौरान की एक महिला के रूप में कपड़े पहने एक व्यक्ति की तस्वीर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर शेयर की है. बताया जा रहा है कि, ये तस्वीर उस पुरुष की है जिसे पहला पुरस्कार त्योहार के दिन मिला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया है, 'केरल के कोल्लम जिले में कोट्टमकुलकारा इलाके में एक देवी मंदिर है जिसमें चमयाविलक्कू त्योहार मनाया जाता है. इस त्योहार में पुरुष, औरतों की तरह तैयार होते हैं. ये तस्वीर उस पुरुष की है जिसे पहला पुरस्कार त्योहार के दिन मिला है.'

इस पोस्ट को अब तक 1.4 मिलियन लोग देख चुके हैं, जबकि 9 हजार से ज्यादा लोगों ने इस पोस्ट को लाइक किया है. पोस्ट देख चुके यूजर्स इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. पोस्ट को खूब देखा और पसंद किया जा रहा है. केरल पर्यटन वेबसाइट के मुताबिक, राज्य भर के पुरुष इस अनूठी रस्म में भाग लेने के लिए महिलाओं की तरह साड़ी पहनकर और सज संवरकर तैयार होते हैं और दिव्य चमायाविलक्कू (पारंपरिक दीपक) धारण करते हैं और पीठासीन देवता के प्रति अपनी भक्ति के प्रतीक के रूप में मंदिर के चारों ओर घूमते हैं व अपनी मनोकामना पूर्ती के लिए दरखास्त लगाते हैं. 

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