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Monday, April 3, 2023

इतिहास से मुगल बाहर? CBSE और UP बोर्ड के 12वीं के पाठ्यक्रम में मुगल काल पर चली कैंची

मुगल साम्राज्य (Mughal Empire) से जुड़े अध्‍याय अब सीबीएसई और यूपी बोर्ड के 12वीं कक्षा के छात्रों के इतिहास के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे. एक शीर्ष अधिकारी ने NDTV को बताया कि स्कूली शिक्षा पर केंद्र और राज्य की शीर्ष सलाहकार संस्था एनसीईआरटी ने इतिहास के पाठ्यक्रम में संशोधन किया है और सीबीएसई की 12वीं कक्षा की मध्यकालीन इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से 'किंग्स एंड क्रॉनिकल्स' और 'द मुगल कोर्ट्स' के अध्यायों को हटा दिया गया है. उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूल एनसीईआरटी की 12वीं कक्षा की नई इतिहास की पाठ्यपुस्तकों को अपनाएंगे, जिसमें मुगलों के बारे में अंश हटा दिए गए हैं. 

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, "हम अपने छात्रों को एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाते हैं. संशोधित संस्करण में जो कुछ भी है, उसका पालन किया जाएगा."

अतिरिक्त मुख्य सचिव (बेसिक और माध्यमिक शिक्षा) दीपक कुमार ने बदलाव की पुष्टि की है. कुमार ने पीटीआई से कहा, "हम एनसीईआरटी की किताबों का पालन करते हैं और संशोधित संस्करण में जो कुछ भी उपलब्ध है, उसका हम राज्य के स्कूलों में 2023-24 सत्र से पालन करेंगे."

12वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की किताबों को संशोधित किया गया है. 'राइज ऑफ पॉपुलर मूवमेंट्स' - भारत में समाजवादी और कम्युनिस्ट पार्टियों के उदय के बारे में और 'एरा ऑफ़ वन पार्टी डॉमिनेंस' - स्वतंत्रता के बाद के युग में कांग्रेस शासन से जुड़े पाठ हटा दिए गए हैं. 

इसके साथ ही 10वीं और 11वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों में भी बदलाव किए गए हैं. कक्षा 10 की राजनीति विज्ञान की किताबों से 'डेमोक्रेसी एंड डाइवर्सिटी', 'पॉपुलर स्‍ट्रगल एंड मूवमेंट्स' वाले चैप्टर हटा दिए गए हैं. वहीं 11वीं की इतिहास की किताबों से 'सेंट्रल इस्लामिक लैंड्स' और 'कंफ्रंटेशन ऑफ कल्‍चर्स' जैसे चैप्टर भी हटा दिए गए हैं.

एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी ने इन बदलावों की पुष्टि की और कहा कि इस साल (2023-24) से ही पाठ्यक्रम को लागू कर दिया जाएगा. 

इनमें से कई बदलावों की घोषणा 2022 की शुरुआत में की गई थी, जब सीबीएसई ने अप्रैल में अपने पाठ्यक्रम में बदलाव किया था. सीबीएसई के तहत आने वाले स्कूलों के साथ ही कुछ राज्य बोर्ड भी एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करते हैं. 

एनसीईआरटी ने एक नोट में कहा था, "पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को कई कारणों से तर्कसंगत बनाया गया है, जिसमें एक ही कक्षा में अन्‍य विषयों में समान सामग्री के साथ ओवरलैपिंग सहित एक ही विषय पर निचली या उच्च कक्षाओं में समान सामग्री शामिल है. 

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